ट्रेन की यात्रा
दोस्तों अभी हाल ही में मैं मुंबई जा रहा था । मैं ट्रेन से यात्रा कर रहा था । इस यात्रा के दौरान हमने ट्रेन में कुछ ऐसे किरदार देखें थे । जिसको नजर अंदाज करना थोड़ा मुश्किल है । कुछ किरदार ऐसे थे जिनपे हशी आ रही थी और कुछ ऐसे थे । जिसको देखकर उन पर तारास आ रहा था । और कुछ पे गुस्सा आ रहा था ।
यात्रा के दौरान कुछ ऐसे लोग मीले ट्रेन में जो हर रोज अपना जन्म दिन की बात कह कर विकलांग की भूमिका निभाकर लोगों को जूठी दुआ देकर अपना कमाई का जरिया बना रखा है वो व्यक्ति हमे यात्रा के दौरान आते जाते दोनो तरफ उससे भेंट हुई और ओ जब मिला तो उसका 43वाँ जन्म दिन ही रहा उसका ।
इसके बाद कुछ ऐसे लोग ट्रेन में दिखे जो सीट के लिए मारामारी करते हुये नजर आए झांसी साइड के लोकल यात्री वो दबंगई करते है । किसी की भी सीट हो वो अपना रौब झाड़ के सीट पर कब्जा जमा लेते है । इस पर टीटीई भी ध्यान नही देते है । जिससे जो लंबी यात्रा करते है उनको काफी परेशानी होती है ।
और आगे बढ़ते है अब हम ईटासी पहोच वहाँ पर 2 अन्धे व्यक्ति ट्रेन पर चढ़े जिसमें एक बूढ़ा आदमी था और एक करीब 35 साल का था जो बूढ़ा आदमी था वह छोटे बच्चों की किताबें और कुछ खिलौने लिये बेंच रहा था ।
और जो जवान था वो अपना दुखड़ा सुना कर पैसे मांग रहा था । ये सब तो ठीक था पर जो बूढ़ा आदमी वो अपनी मेहनत करके पैसे कमा रहा था ।जो की लोग उसको देख और समझ नही रहे थे । एक जो अंधे होने फायदा उठा रहा था उसको लोग पैसे दिये जा रहे थे ।
उसके बाद ट्रेन में किन्नरों की टोली आई और वो इतने लुच्चे और लफंगे थे की जो भी उनको कहा जाए वह काम है । क्योंकि वह किसी की मजबूरी को नही देखते है उन्हें सिर्फ और सिर्फ पैसों से मतलब रखते है । यदि इनको पैसे नही मिलते है तो ये ऐसी बेइज्जती करते है कि कुछ कहने को नही बनता है । और तो और हमारे सीट के सामने वाले लड़के को पैसे न देने पर गली देने लगा और जब लड़के के बरदास से बाहर हुआ तो लड़के ने भी गाली दिया तो सारे किन्नर एकत्रित होकर लड़के को थप्पड़ मार दिया । और धमकियां देने लगे ।
इन किन्नरों के चलते बहुत से लोग यात्रा के दौरान परेसानी का सामना करना पड़ता है ।
यात्रा के दौरान कुछ ऐसे लोग मीले ट्रेन में जो हर रोज अपना जन्म दिन की बात कह कर विकलांग की भूमिका निभाकर लोगों को जूठी दुआ देकर अपना कमाई का जरिया बना रखा है वो व्यक्ति हमे यात्रा के दौरान आते जाते दोनो तरफ उससे भेंट हुई और ओ जब मिला तो उसका 43वाँ जन्म दिन ही रहा उसका ।
इसके बाद कुछ ऐसे लोग ट्रेन में दिखे जो सीट के लिए मारामारी करते हुये नजर आए झांसी साइड के लोकल यात्री वो दबंगई करते है । किसी की भी सीट हो वो अपना रौब झाड़ के सीट पर कब्जा जमा लेते है । इस पर टीटीई भी ध्यान नही देते है । जिससे जो लंबी यात्रा करते है उनको काफी परेशानी होती है ।
और आगे बढ़ते है अब हम ईटासी पहोच वहाँ पर 2 अन्धे व्यक्ति ट्रेन पर चढ़े जिसमें एक बूढ़ा आदमी था और एक करीब 35 साल का था जो बूढ़ा आदमी था वह छोटे बच्चों की किताबें और कुछ खिलौने लिये बेंच रहा था ।
और जो जवान था वो अपना दुखड़ा सुना कर पैसे मांग रहा था । ये सब तो ठीक था पर जो बूढ़ा आदमी वो अपनी मेहनत करके पैसे कमा रहा था ।जो की लोग उसको देख और समझ नही रहे थे । एक जो अंधे होने फायदा उठा रहा था उसको लोग पैसे दिये जा रहे थे ।
उसके बाद ट्रेन में किन्नरों की टोली आई और वो इतने लुच्चे और लफंगे थे की जो भी उनको कहा जाए वह काम है । क्योंकि वह किसी की मजबूरी को नही देखते है उन्हें सिर्फ और सिर्फ पैसों से मतलब रखते है । यदि इनको पैसे नही मिलते है तो ये ऐसी बेइज्जती करते है कि कुछ कहने को नही बनता है । और तो और हमारे सीट के सामने वाले लड़के को पैसे न देने पर गली देने लगा और जब लड़के के बरदास से बाहर हुआ तो लड़के ने भी गाली दिया तो सारे किन्नर एकत्रित होकर लड़के को थप्पड़ मार दिया । और धमकियां देने लगे ।
इन किन्नरों के चलते बहुत से लोग यात्रा के दौरान परेसानी का सामना करना पड़ता है ।
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