बक्शी का तालाब
मुझे गर्व है कि मैं "बक्शी का तालाब" से हूँ । हमारा बाक्शी का तालाब बहुत प्राचीन और ऐतिहासिक तालाब है । इस तालाब का निर्माण सन् 1840 में कन्नौज के राजा " त्रिपुर चन्द्र बक्शी " जी ने करवाया था ।यह तालाब उस समय का साही तालाब था। इस तालाब में साल के 12 महीनो पानी भी रहता था ।
समय बदलता गया और इसकी उचित देख रेख न होने से इस तालाब का पानी खत्म हो गया ।
इस तालाब की बनावट बहुत ही सुंदर और लाजवाब है । इस तालाब में चार 'घाट' और आठ 'बुर्ज' बने हैं ।
और पूर्व की ओर हवेलीनुमा पुराना घाट बना हुआ है । और इस तालाब में धारा जाने और नहाने धोने की अच्छी व्यवस्था बनी है ।
इसलिये इस तालाब की सुंदरता का जितना भी बखान किया जाए वह काम है ।
इस तालाब की वजह से यहाँ का नाम बक्शी का तालाब पड़ गया ।
अब इस तालाब का सौन्दरीकरन करके इस तालाब को और भी सुंदर बना दिया गया है ।
और अब ये तालाब पर्यटक स्थलों में आ गया है । अब इसको देखने के लिए देश और विदेश से लोग आते रहते है।
और भी इस बक्शी का तालाब बहोत कुछ है जो इतिहासिक ओर पुराणिक है । जैसे यहाँ की 'रामलीला' इतिहासिक है । जोकि "हिन्दू मुस्लिम एकता का प्रतीक " है।
इस रामलीला में राम और लक्ष्मण की भूमिका मुस्लिम लड़के ही कई सालों से बहोत ही अच्छी तरीके से निभाते आ रहे है। और भी कई अहम किरदारों की भमिका मुस्लिम समुदाय के लोग निभा रहे है।
और यहाँ से कुछ ही दूरी पर " 51शक्ति पीठ देवऋषी आश्रम " है । कहते है यहाँ पर 'माता सती ' के पार्थिक शरीर को विष्णु जी ने अपने चक्र से नस्ट किया था । तो माता सती के शरीर के 51 टुकडे हुए थे । जिनमें से 1 टुकड़ा यहाँ बक्शी का तालाब पर गिरा था ।
इसी बक्शी का तालाब में तालाब से 11किलोमीटर की दूरी पर "माँ चन्द्रिका देवी " का दरबार है जो कि पर्यटकस्थल की श्रेणी में आता है।
और यहाँ हजारों लाखों की तादात में दूर दूर से भक्त लोग माँ चन्द्रिका देवी के दर्शन करने आते हैं । और यहाँ से मन माँगी मुराद पाते है ।
कहते है कि 1 साल की कोई 4 शानिवार को पढ़ने वाली अमावस्या को माता चन्द्रिका देवी के दर्शन करने से 4 धाम के दर्शन करने से जो फ़ल के बराबर फल मिलता है ।
इस तालाब की बनावट बहुत ही सुंदर और लाजवाब है । इस तालाब में चार 'घाट' और आठ 'बुर्ज' बने हैं ।
और पूर्व की ओर हवेलीनुमा पुराना घाट बना हुआ है । और इस तालाब में धारा जाने और नहाने धोने की अच्छी व्यवस्था बनी है ।
इसलिये इस तालाब की सुंदरता का जितना भी बखान किया जाए वह काम है ।
इस तालाब की वजह से यहाँ का नाम बक्शी का तालाब पड़ गया ।
अब इस तालाब का सौन्दरीकरन करके इस तालाब को और भी सुंदर बना दिया गया है ।
और अब ये तालाब पर्यटक स्थलों में आ गया है । अब इसको देखने के लिए देश और विदेश से लोग आते रहते है।
और भी इस बक्शी का तालाब बहोत कुछ है जो इतिहासिक ओर पुराणिक है । जैसे यहाँ की 'रामलीला' इतिहासिक है । जोकि "हिन्दू मुस्लिम एकता का प्रतीक " है।
इस रामलीला में राम और लक्ष्मण की भूमिका मुस्लिम लड़के ही कई सालों से बहोत ही अच्छी तरीके से निभाते आ रहे है। और भी कई अहम किरदारों की भमिका मुस्लिम समुदाय के लोग निभा रहे है।
और यहाँ से कुछ ही दूरी पर " 51शक्ति पीठ देवऋषी आश्रम " है । कहते है यहाँ पर 'माता सती ' के पार्थिक शरीर को विष्णु जी ने अपने चक्र से नस्ट किया था । तो माता सती के शरीर के 51 टुकडे हुए थे । जिनमें से 1 टुकड़ा यहाँ बक्शी का तालाब पर गिरा था ।
इसी बक्शी का तालाब में तालाब से 11किलोमीटर की दूरी पर "माँ चन्द्रिका देवी " का दरबार है जो कि पर्यटकस्थल की श्रेणी में आता है।
और यहाँ हजारों लाखों की तादात में दूर दूर से भक्त लोग माँ चन्द्रिका देवी के दर्शन करने आते हैं । और यहाँ से मन माँगी मुराद पाते है ।
कहते है कि 1 साल की कोई 4 शानिवार को पढ़ने वाली अमावस्या को माता चन्द्रिका देवी के दर्शन करने से 4 धाम के दर्शन करने से जो फ़ल के बराबर फल मिलता है ।
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